Friday, October 17, 2008

कविता

दर्द

- संजीव जैन, हैदराबाद ।

मेहता जी ने गर्भपात के ​लिए दरवाजा तो खटखटाया
माननीय जजों ने भी अपना फैसला सुनाया।
ले​किन इस बार जल्‍द ​निणर्य तो आया
२० हफ्ते का गर्भ कोर्ट ने बचाया ।

जब बच्‍चा गर्भ से बाहर आएगा
माँ से क्‍या ​अपना दर्द ​​​​​​छिपाएगा ?
जीवन उसको प्‍यारा नज़र आएगा ?
माँ को माफ़ क्‍या कर पाएगा ?
अनचाही औलाद का सपना मन में सजाएगा ?

बीमारी से ज्‍यादा अनचाहे होने का दर्द उसे सताएगा।

1 comment:

Sherfraz said...

dard ki paribhashsa bemisaal.