Tuesday, July 30, 2013

दिव्या एम.पी. की कविता - 'वक्त'


कविता
वक़्त


-    दिव्या एम.पी.

वक़्त हर चीज़ का होता है
अपने वक़्त के लिए इंतज़ार करो
और उस वक़्त के लिए तैयार रहो
अपनी ज़िंदगी को कभी भी
किसी नियति पर मत छोड़ो
ज़िंदगी तुम्हारी है
जीना तुम्हें है
अपनी ज़िंदगी खुद बनाओ
किसी और पर मत छोड़ो
सहारा कोई भी दे सकते
मदद किसी से माँग सकते
लेकिन ज़िंदगी भर....?
नहीं, नहीं मिलेगा ज़िंदगी भर
किसी का भी.... !
 

 

9 comments:

usha.digitalinfo said...
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usha.digitalinfo said...
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usha.digitalinfo said...
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Nitish Tiwary said...

ati sundar rachna
mere niji blog par aap sabhi ka swagat hai..
http://iwillrocknow.blogspot.in/

Nitish Tiwary said...

nice lines
welcome to my blog
http://iwillrocknow.blogspot.in/

मदन मोहन सक्सेना said...

बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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