Thursday, June 24, 2010

हाइकु


संजीव 'सलिल
*
कोई किसी का
सलिल न अपना
न ही पराया.
*
मेरे स्वर ने
कविता रचकर
तुमको गाया.
*
मैं तुम दो से
एक बन गए हैं
नीर-क्षीर हो.
*
हँसे चमन
नयन न हो नम
रहे अमन.
*
पराप्रकृति
श्री राधा-श्री कृष्ण थे
परापुरुष..
*
है अनुबंध
सुमन-भ्रमर में
झूमेंगे साथ..
*
कहे झरना.
लाद मत कुसुम.
शीघ्र झरना.
*
'ईंट-रेत का
मंदिर मनहर
देव लापता.
***

1 comment:

आचार्य जी said...

बहुत सुन्दर।