Showing posts with label प्रो. तिप्पेस्वामी जी. Show all posts
Showing posts with label प्रो. तिप्पेस्वामी जी. Show all posts

Tuesday, January 27, 2026

भावभीनी श्रद्धांजली - प्रख्यात विद्वान, शिक्षक एवं मूर्धन्य साहित्यिक अनुवादक प्रो. तिप्पेस्वामी जी का निधन


भावभीनी श्रद्धांजली

प्रो. तिप्पेस्वामी जी का स्वर्गवास

हिंदी–कन्नड़ साहित्यिक एवं अकादमिक जगत के लिए अत्यंत दुःख के साथ यह सूचित किया जाता है कि प्रो. तिप्पेस्वामी, प्रख्यात विद्वान, शिक्षक एवं मूर्धन्य साहित्यिक अनुवादक, का आज (27 जनवरी, 2026) सायंकाल निधन हो गया। उनका देहावसान भारतीय भाषा-साहित्य, विशेषतः अनुवाद अध्ययन के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति है।

प्रो. तिप्पेस्वामी मैसूर विश्वविद्यानिलय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे। अपने दीर्घ शैक्षणिक जीवन में उन्होंने न केवल हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन-अध्यापन को सुदृढ़ किया, बल्कि कर्नाटक में हिंदी अध्ययन की परंपरा को एक नई दिशा भी प्रदान की। वे एक प्रेरणादायी शिक्षक, संवेदनशील मार्गदर्शक और अनुशासित विद्वान के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित थे।

शिक्षण के साथ-साथ प्रो. तिप्पेस्वामी ने हिंदी और कन्नड़ भाषाओं के बीच साहित्यिक अनुवाद के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया। उनके अनुवाद भाषिक रूपांतरण मात्र न होकर सांस्कृतिक सेतु का कार्य करते थे। उन्होंने दोनों भाषाओं की साहित्यिक परंपराओं के बीच संवाद को सशक्त किया और बहुभाषिक भारतीय साहित्य की अवधारणा को व्यवहार में साकार किया।

उनकी इस महत्त्वपूर्ण साहित्यिक सेवा के लिए उन्हें साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारतीय भाषाओं के बीच उत्कृष्ट अनुवाद कार्य के लिए दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। यह पुरस्कार उनके भाषिक कौशल, साहित्यिक संवेदना और अनुवाद-कर्म के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

प्रो. तिप्पेस्वामी का व्यक्तित्व सादगी, विनम्रता और अकादमिक निष्ठा से परिपूर्ण था। वे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सहकर्मियों के लिए सदैव प्रेरणा-स्रोत रहे। उनके द्वारा किया गया कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।

शैक्षणिक एवं साहित्यिक समुदाय उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार, शिष्यों एवं शुभचिंतकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट करता है।

प्रो. तिप्पेस्वामी जी की शताधिक रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं, कुछ रचनाओं की सूची इस प्रकार है:- समागम, अस्मिता की खोज (आलोचना); संपादन-आधुनिक गद्य और कहानी-संग्रह, रत्न करंजक, आधुनिक गद्य और पद्य-संग्रह, स्नातक हिंदी गद्य संपदा, स्नातक हिंदी पद्य संपदा, कन्नड की श्रेष्ठ कहानियाँ, राष्ट्रकवि कुवेंपु की कविताएँ, एकांकी विभा, एकांकी कौस्तुभ। अनुवाद-हिंदी से कन्नड़-महामंत्री (उपन्यास, मोहनलाल महती वियोगी), मुद्द्टदिरु नेरळ मनवे (उपन्यास, हिंमाशु| जोशी), प्रेत (उपन्यास, श्रवणकुमार), निर्मला (उपन्यास, प्रेमचंद), रानी नागफणी (उपन्यास, हरिशंकर परिसाई), दीक्षे (उपन्यास, नरेंद्र कोहली), आ दिनगळु (उपन्यास, निर्मल वर्मा), अमृत मत्तु विष (उपन्यास, अमृतलाल नागर), अंधायुग (नाटक, धर्मवीर भारती), सिंहासन खाली इदे (नाटक, सुशीलकुमार सिंह), रावी नदिया दंडेयल्लि (नाटक, असगर वज्ञाहत), सरदार बल्लभभाई पटेल डॉ. लोहया (जीवनी, विष्णुप्रभाकर), मनीषी (व्यक्ति चित्र), गंगा कावेरी (कहानी), डॉ. नाळींकर अवर वैज्ञानिक कथेगळु (कहानियाँ, डॉ. जयंत नाळकर), डॉ. राजेंद्रप्रसाद (जीवनी, वाल्मीकि चौधरी), डॉ. लोहिया (जीविनी, ओमप्रकाश दीपक), नेले (उपन्यास, हरिशंकर परसाई); कन्नड़ से हिंदी-उद्भव (उपन्यास, वी०वी० वैकुंठराजु), रथमुसल (नाटक, रामचंद्रदेव), किस्सा मुर्गे का (नाटक, देवनूर महादेव), अल्लमप्रभु के वचन (अल्लमप्रभु), लौट आया चम्पू (बालसाहित्य, आनंद पाटिल), अल्लमप्रभु (जीवनी, बसवराज पुराणिक), अल्लमप्रभु के चुने हुए 108 वचन (संपादक टी-आर. महादेव्या) आदि ।

       आचार्य तिप्पेस्वामी जी को प्रेमचंद का हिंदी उपन्यास निर्मला के कन्नड़ अनुवाद के लिए साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार (1995) के अलावा कई अन्य उल्लेखनीय पुरस्कार मिल चुके हैं ।  उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सौहार्द सम्मान 1994कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार 1995, हिंदीतर भाषी हिंदी आदि ।  इन दुःखद क्षणों में उनकी तमाम रचनाओं के नाम यहाँ न दे पाने के लिए क्षंतव्य हूँ । (शीघ्र ही विस्तार से तिप्पेस्वामी जी के योगदान पर ‘युग मानस’ के पाठकों को जानकारी दी जाएगी ।

ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके शोक संतप्त परिवार और उनके असंख्य साहित्य प्रेमियों, छात्रों को इस अपूरणीय क्षति सहने की क्षमता प्रदान करे। 'युग मानस' की भावभीनी श्रद्धांजली ।

ಶ್ರದ್ಧಾಂಜಲಿ

ಪ್ರೊ. ತಿಪ್ಪೇಸ್ವಾಮಿ
(ಹಿಂದಿ ವಿಭಾಗದ ನಿವೃತ್ತ ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕರು, ಮೈಸೂರು ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯ)**

ಹಿಂದಿ–ಕನ್ನಡ ಸಾಹಿತ್ಯ ಮತ್ತು ಅಕಾಡೆಮಿಕ್ ಲೋಕಕ್ಕೆ ಅಪಾರ ದುಃಖವನ್ನುಂಟುಮಾಡುವಂತೆ, ಮೈಸೂರು ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಹಿಂದಿ ವಿಭಾಗದ ನಿವೃತ್ತ ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕರಾದ ಪ್ರೊ. ತಿಪ್ಪೇಸ್ವಾಮಿ ಅವರು ನಿನ್ನೆ ಸಂಜೆ ವಿಧಿವಶರಾದರು.

ಪ್ರೊ. ತಿಪ್ಪೇಸ್ವಾಮಿ ಅವರು ಒಬ್ಬ ನಿಷ್ಠಾವಂತ ಶಿಕ್ಷಕರಾಗಿಯೂ, ಪ್ರಖ್ಯಾತ ಪಂಡಿತರಾಗಿಯೂ ಹಾಗೂ ಹಿಂದಿ–ಕನ್ನಡ ಸಾಹಿತ್ಯದ ಮಧ್ಯೆ ಸೇತುವೆಯಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸಿದ ಖ್ಯಾತ ಅನುವಾದಕರಾಗಿಯೂ ಪ್ರಸಿದ್ಧರಾಗಿದ್ದರು. ಅವರ ಅನುವಾದ ಕಾರ್ಯವು ಕೇವಲ ಭಾಷಾಂತರವಾಗಿರದೆ, ಎರಡು ಸಾಹಿತ್ಯ ಪರಂಪರೆಗಳ ನಡುವಿನ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ಸಂವಾದವನ್ನು ಸಮೃದ್ಧಗೊಳಿಸಿತು.

ಭಾರತೀಯ ಭಾಷೆಗಳ ನಡುವಿನ ಅನುವಾದ ಕ್ಷೇತ್ರಕ್ಕೆ ನೀಡಿದ ಅಮೂಲ್ಯ ಕೊಡುಗೆಯಿಗಾಗಿ ಅವರಿಗೆ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಅನುವಾದ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಲಭಿಸಿತ್ತು. ಇದು ಅವರ ಸಾಹಿತ್ಯಿಕ ಸಂವೇದನೆ, ಭಾಷಾ ಪ್ರೌಢಿಮೆ ಮತ್ತು ಅನುವಾದದ ಮೇಲಿನ ಅಟುಟ ನಿಷ್ಠೆಗೆ ದೊರೆತ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದ ಗೌರವವಾಗಿದೆ.

ಸರಳತೆ, ವಿನಯ ಮತ್ತು ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ನೈತಿಕತೆ ಅವರ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವದ ಮೂಲ ಲಕ್ಷಣಗಳಾಗಿದ್ದವು. ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು, ಸಂಶೋಧಕರು ಮತ್ತು ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳ ಹೃದಯಗಳಲ್ಲಿ ಅವರು ಸದಾ ಜೀವಂತವಾಗಿರುತ್ತಾರೆ.

अश्रुपूरित नयनों से...

डॉ. सी. जय शंकर बाबु