Sunday, July 12, 2009

बाल मानस

बाल गीत


- संजीव 'सलिल'


रुन-झुन करती आयी पारुल.


सब बच्चों को भायी पारुल.


बादल गरजे, तनिक न सहमी.


बरखा लख मुस्कायी पारुल.


चम-चम बिजली दूर गिरी तो,


उछल-कूद हर्षायी पारुल.


गिरी-उठी, पानी में भीगी.


सखियों सहित नहायी पारुल.


मैया ने जब डांट दिया तो-


मचल-रूठ-गुस्सायी पारुल.


छप-छप खेले, ता-ता थैया.


मेंढक के संग धायी पारुल.


'सलिल' धार से भर-भर अंजुरी.


भिगा-भीग मस्तायी पारुल.

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