युग मानस       YUG MANAS
Sunday, February 28, 2010

होली की शुभकामनाएँ

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होली पर्व पर विशेष कविताएँ रंगों का नव पर्व बसंती -संजीव सलिल रंगों का नव पर्व बसंती सतरंगा आया सद्भावों के जंगल गायब पर्वत पछताया आशा पंछी ...
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युग मानस yugmanas
सर्जनात्मक साहित्य को प्रोत्साहित करने एवं मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हेतु एक अनुष्ठान के रूप में 1994 से युग मानस सक्रिय है । गुंतकल (आंध्र प्रदेश) से युग मानस का प्रकाशन शुरू होते ही देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु इससे जुड़े हैं, मैं उन सबके प्रति परम आभारी हूँ । डा. सी. जय शंकर बाबु Dr. C. JAYA SANKAR BABU
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