युग मानस       YUG MANAS
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Saturday, July 4, 2015

मुक्तिका:

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मुक्तिका: संजीव * हाथ माटी में सनाया मैंने ये दिया तब ही बनाया मैंने खुद से खुद को न मिलाया मैंने या खुदा तुझको भुलाया मैं...
Wednesday, March 20, 2013

अम्मी

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मुक्तिका: अम्मी संजीव 'सलिल' * माहताब की जुन्हाई में, झलक तुम्हारी पाई अम्मी. दरवाजे, कमरे आँगन में, हरदम पडी दिखाई अम्मी. कौन...
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युग मानस yugmanas
सर्जनात्मक साहित्य को प्रोत्साहित करने एवं मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हेतु एक अनुष्ठान के रूप में 1994 से युग मानस सक्रिय है । गुंतकल (आंध्र प्रदेश) से युग मानस का प्रकाशन शुरू होते ही देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु इससे जुड़े हैं, मैं उन सबके प्रति परम आभारी हूँ । डा. सी. जय शंकर बाबु Dr. C. JAYA SANKAR BABU
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