युग मानस       YUG MANAS
Sunday, October 30, 2016

चलो, दिवाली आज मनायें

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कविता चलो ,  दिवाली आज मनायें   - आचार्य बलवन्त                   हर    आँगन में   उजियारा   हो ,  तिमिर   मिटे   संसार   का।   ...
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युग मानस yugmanas
सर्जनात्मक साहित्य को प्रोत्साहित करने एवं मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हेतु एक अनुष्ठान के रूप में 1994 से युग मानस सक्रिय है । गुंतकल (आंध्र प्रदेश) से युग मानस का प्रकाशन शुरू होते ही देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु इससे जुड़े हैं, मैं उन सबके प्रति परम आभारी हूँ । डा. सी. जय शंकर बाबु Dr. C. JAYA SANKAR BABU
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