Thursday, June 24, 2010
हाइकु
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संजीव 'सलिल * कोई किसी का सलिल न अपना न ही पराया. * मेरे स्वर ने कविता रचकर तुमको गाया. * मैं तुम दो से एक बन गए हैं नीर-क्षीर हो. * हँस...
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