युग मानस       YUG MANAS
Saturday, May 29, 2010

श्यामल सुमन की काव्य-सरिता

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सिफर का सफ़र नज़र बे-जुबाँ और जुबाँ बे-नज़र है इशारे समझने का अपना हुनर है सितारों के आगे अलग भी है दुनिया नज़र तो उठाओ उसी की कसर है मुहब्बत की...
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युग मानस yugmanas
सर्जनात्मक साहित्य को प्रोत्साहित करने एवं मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हेतु एक अनुष्ठान के रूप में 1994 से युग मानस सक्रिय है । गुंतकल (आंध्र प्रदेश) से युग मानस का प्रकाशन शुरू होते ही देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु इससे जुड़े हैं, मैं उन सबके प्रति परम आभारी हूँ । डा. सी. जय शंकर बाबु Dr. C. JAYA SANKAR BABU
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