Saturday, October 24, 2009
दोहों की दुनिया
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- संजीव 'सलिल' देह नेह का गेह हो, तब हो आत्मानंद. स्व अर्पित कर सर्व-हित, पा ले परमानंद.. मन से मन जोड़ा नहीं, तन से तन को जोड़. बना ...
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